अभियंत् वार्ता | छतरपुर
छतरपुर जिले के मऊसहानियां स्थित धुबेला संग्रहालय क्षेत्र में लगातार घट रही मारपीट, हमले और हत्या जैसी गंभीर घटनाओं ने पर्यटन सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। नए वर्ष से ठीक पहले इस तरह की घटनाओं से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों में डर का माहौल बनता जा रहा है, वहीं जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही भी खुलकर सामने आ रही है।धुबेला संग्रहालय का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गौरवशाली है। यह संग्रहालय महाराजा छत्रसाल के ऐतिहासिक महल में स्थित है, जिसका उद्घाटन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 12 सितंबर 1955 को किया था। यहां बुंदेलखंड के गौरवशाली इतिहास और विरासत को सहेजकर रखा गया है। संग्रहालय के चारों ओर अनेक ऐतिहासिक स्मारक मौजूद हैं, जिन्हें देखने के लिए कभी देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते थे।
हालांकि, बीते कुछ वर्षों से धुबेला संग्रहालय क्षेत्र का माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के चलते यहां आपराधिक घटनाओं में इजाफा हुआ है। करीब दस वर्ष पहले शीतल गढ़ी के पास पहाड़ी पर एक युवती पर तेजाब डालकर उसकी हत्या कर दी गई थी। इसी तरह तपस्वी जी मंदिर तिराहे पर अज्ञात व्यक्तियों द्वारा एक युवक की हत्या की घटना भी सामने आ चुकी है।
हाल के महीनों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। दो महीने पहले हृदय शाह महल के पास कुछ युवक-युवतियों द्वारा एक युवक पर शराब की बोतल से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। ताजा मामला रविवार का है, जब महाराजा छत्रसाल की समाधि के पास संग्रहालय घूमने आए युवक-युवतियों के साथ कुछ युवकों ने बेल्ट और डंडों से बेरहमी से मारपीट की। इस घटना का वीडियो कैमरे में कैद हो गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
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