ससुर की हत्या में दामाद को उम्रकैद, डीएनए रिपोर्ट बनी अहम साक्ष्य


छतरपुर। रिश्तों को शर्मसार कर देने वाले सनसनीखेज हत्याकांड में न्यायालय ने सख्त फैसला सुनाया है। छतरपुर के तृतीय अपर जिला न्यायाधीश निवेश कुमार जायसवाल की अदालत ने ससुर की हत्या के दोषी दामाद गोलू उर्फ मनीष विश्वकर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं साक्ष्य छुपाने के दोष में सुनील गुप्ता को 3 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया गया है।
यह घटना 28 जुलाई 2023 की है। विश्वनाथ कॉलोनी निवासी निशांत गौतम ने अपने पिता जगदीश प्रसाद गौतम का रक्तरंजित शव घर के बाहर चबूतरे पर पड़ा देखा था। निशांत जब नौगांव से वापस लौटा तो घर के अंदर और बाहर खून के निशान देखकर उसके होश उड़ गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
विवेचना के दौरान पुलिस का शक मृतक के दामाद गोलू उर्फ मनीष विश्वकर्मा पर गया। पुलिस अभिरक्षा में पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रचने की बात कबूल कर ली। आरोपी को शक था कि उसके ससुर ने उसकी पत्नी और बच्ची को कहीं छिपा रखा है। इसी रंजिश के चलते उसने अपने साथी वीरेंद्र अहिरवार और अमन गुप्ता के साथ मिलकर धारदार हथियार (गुप्ती) से हमला कर जगदीश गौतम की हत्या कर दी।
वारदात के बाद हथियार को ठिकाने लगाने में अमन गुप्ता के चाचा सुनील गुप्ता ने मदद की। पुलिस ने घटनास्थल से खून से सनी तौलिया, बका और आरोपियों के कपड़े जब्त कर एफएसएल जांच के लिए भेजे। वैज्ञानिक जांच में डीएनए रिपोर्ट अहम साबित हुई, जिसमें पुष्टि हुई कि आरोपी की शर्ट पर लगा खून मृतक का ही था।
निरीक्षक अरविंद सिंह दांगी द्वारा की गई सटीक विवेचना और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे जघन्य अपराध की श्रेणी में रखा गया था।
यह फैसला कानून के इकबाल और रिश्तों की मर्यादा बनाए रखने का एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

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