छतरपुर।
जिले में वर्षों से विधिवत स्वीकृत और नियमों के अनुसार संचालित खनन पट्टों पर अचानक “ट्रिगर” का हवाला देकर अवैध उत्खनन की कार्रवाई किए जाने से खनन पट्टा धारकों में भारी आक्रोश है। जिले के समस्त पेदेदारों ने खनिज प्रशासन पर मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए इस संबंध में औपचारिक अभ्यावेदन दिया है।
पेदेदारों का कहना है कि उन्हें खनन पट्टे विभाग द्वारा विधिवत स्वीकृत किए गए थे। राजस्व निरीक्षक, पटवारी, खनिज निरीक्षक व सर्वेयर की उपस्थिति में स्वीकृत क्षेत्रों का सीमांकन कराया गया, सीमास्तंभ बनाए गए और भूप्रवेश (कार्य अनुमति) मिलने के बाद ही उत्खनन कार्य शुरू किया गया। वर्षों तक विभाग द्वारा निरीक्षण भी होता रहा और क्रेशिंग व विक्रय के आधार पर कर निर्धारण कराया जाता रहा।
बिना सुधार अवसर के जुर्माने की कार्रवाई
पेदेदारों ने आरोप लगाया कि हाल ही में उसी स्वीकृत क्षेत्र को ट्रिगर बताकर अवैध घोषित कर नोटिस व भारी जुर्माने लगाए गए, जबकि यदि जीपीएस, केएमएल या तकनीकी स्तर पर कोई त्रुटि थी तो पहले सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए था। सीधे दंडात्मक कार्रवाई करना विधिसंगत नहीं है।
खनन योजना व पर्यावरणीय स्वीकृति का हवाला
अभ्यावेदन में कहा गया है कि खनन योजना सक्षम व पात्र एजेंसियों से बनवाई गई थी और पर्यावरणीय स्वीकृति के पश्चात ही खनन कार्य किया गया। जिन खदानों को विभाग द्वारा पूर्व में अनुमत और कार्यशील माना गया, उन्हें अब अचानक अवैध घोषित करना अनुचित है।
रॉयल्टी व उत्पादन को लेकर आपत्ति
पेदेदारों का तर्क है कि कच्चे माल (बोल्डर) पर रॉयल्टी देय नहीं होती, बल्कि गिट्टी निर्माण व विक्रय पर शासन को रॉयल्टी प्राप्त होती है। केवल अनुमानित उत्पादन के आधार पर तत्काल रॉयल्टी भुगतान का दबाव बनाना नियमों के विरुद्ध है।
भोपाल स्तर तक भेजी गई प्रतिलिपि
इस पूरे मामले को लेकर पेदेदारों ने संचालक, भूगर्भिकी एवं खनिज कर्म, भोपाल तथा सचिव, खनिज साधन विभाग भोपाल को भी प्रतिलिपि भेजते हुए मांग की है कि पूर्व से स्वीकृत क्षेत्रों में किए गए वैधानिक उत्खनन को अवैध न माना जाए और भारी जुर्माने की कार्रवाई वापस ली जाए।
पेदेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे आगे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
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