छतरपुर (म.प्र.)।
बुंदेलखंड क्षेत्र का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र माने जाने वाला जिला अस्पताल छतरपुर इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लगभग पांच जिलों से आने वाले मरीजों की बड़ी उम्मीद इस अस्पताल से जुड़ी होती है, लेकिन हाल के दिनों में सामने आ रही लापरवाही की घटनाओं से लोगों में मायूसी बढ़ती जा रही है।
ऐसा ही एक मामला 9 जनवरी को सामने आया, जहां चंदला विकासखंड के ग्राम रायपुर निवासी रचना पति संतोष पटेल (उम्र 21 वर्ष) को शाम करीब 5 बजे जिला अस्पताल छतरपुर में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार महिला गर्भवती थी और उसे प्रसव पीड़ा के चलते अस्पताल लाया गया।
डॉक्टर पर निजी अस्पताल भेजने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल के लेबर रूम में मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद यह कह दिया कि महिला के पेट में पल रहे बच्चे की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. साक्षी ने अस्पताल में भीड़ का हवाला देते हुए महिला को निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
परिजनों का दावा है कि इसी दौरान डॉक्टर द्वारा निजी अस्पताल में इलाज के लिए 18 हजार रुपये की डील तय की गई।
प्राइवेट अस्पताल में रातभर भर्ती, नहीं मिला फायदा
डॉक्टर के कहने पर परिजन 9 जनवरी की शाम 6 बजे महिला को एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसे रातभर भर्ती रखा गया, लेकिन इलाज के बावजूद महिला की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। जब सुबह तक कोई राहत नहीं मिली तो आक्रोशित पति ने निजी अस्पताल में हंगामा कर दिया।
इसके बाद मजबूरी में 10 जनवरी की सुबह करीब 10 बजे महिला को पुनः जिला अस्पताल छतरपुर में भर्ती कराया गया।
मिलीभगत के आरोप, सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग
इस पूरे मामले ने जिला अस्पताल और निजी अस्पताल की कथित मिलीभगत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का कहना है कि यदि जिला अस्पताल में इलाज संभव नहीं था, तो महिला को दोबारा वहीं क्यों भर्ती किया गया।
घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आ गई है। पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की शिकायत कर दोषी डॉक्टरों और संबंधित निजी अस्पताल पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
"अभियंत वार्ता छतरपुर "
जिला चिकित्सालय छतरपुर
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