छतरपुर !
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के वन मंडल अंतर्गत बिजावर वन परिक्षेत्र में पदस्थ रेंजर और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि देवरी बीट के कक्ष क्रमांक 371/372 में कैम्पा मद से कराए गए दो प्लांटेशन कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई हैं।
जानकारी के अनुसार, इन दोनों प्लांटेशनों की अनुमानित लागत करीब 45 से 50 लाख रुपये बताई जा रही है। योजना के तहत लगभग 30 हेक्टेयर भूमि पर सागौन प्रजाति के करीब 15 हजार पौधों का रोपण किया जाना था। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। मौके पर न तो 75 एकड़ के आसपास भूमि का रकबा स्पष्ट दिख रहा है, न ही सागौन के पौधों की संख्या निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप दिखाई दे रही है। इसके अलावा प्लांटेशन की सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम भी नजर नहीं आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि रेंजर और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से लाखों रुपये की शासकीय राशि का गबन किया है। इस कथित भ्रष्टाचार की पोल उस समय खुली जब प्लांटेशन कार्य में लगे पाल समाज के कुछ मजदूरों ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा जाहिर की।
मजदूरों ने कैमरे पर बताया कि उन्होंने प्लांटेशन में गड्ढे खोदने और पौधे लगाने का कार्य किया, लेकिन आज तक उन्हें उनकी मजदूरी नहीं मिली। मजदूरों के अनुसार, जब उन्होंने रेंजर से संपर्क किया तो यह कहकर टाल दिया गया कि मजदूरी की राशि उनके खातों में भेज दी गई है।
विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि मजदूरी की राशि खातों में ट्रांसफर तो की गई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह रकम वास्तविक मजदूरों के खातों में गई या किसी अन्य के। यह मामला भी जांच के दायरे में आता है।
इसके साथ ही यह भी एक अहम सवाल खड़ा हो गया है कि क्या वास्तव में 30 हेक्टेयर क्षेत्र में 15 हजार सागौन के पौधे लगाए गए हैं या केवल कागजों में ही काम दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया है। क्षेत्र में इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी छतरपुर वन मंडल क्षेत्र में अवैध कटाई और अन्य अनियमितताओं को लेकर वन विभाग के अधिकारियों पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो शासन की योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेंगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि उच्च अधिकारी इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और सच्चाई कब तक सामने आती है।
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