
नई दिल्ली।ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार समझौतों के बाद यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ ऐतिहासिक ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ पर मुहर लगाकर भारत ने वैश्विक व्यापार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। इसके बाद अमेरिका पर भारत के साथ व्यापार समझौता करने का दबाव और बढ़ गया है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है और इस सप्ताह संयुक्त बयान जारी हो सकता है।करीब छह महीने पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को ‘मृत अर्थव्यवस्था’ करार दिए जाने के बावजूद, भारत के विशाल बाजार और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को अमेरिका नजरअंदाज नहीं कर सका। विशेषज्ञों का मानना है कि ईयू के बाद अमेरिका के साथ होने वाला यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती देगा।
श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा लाभ
अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते से कपड़ा, चमड़ा, जूते (चमड़े व गैर-चमड़े), रत्न-आभूषण, कालीन और हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अब तक ऊंचे टैरिफ के कारण इन क्षेत्रों के निर्यात में बाधाएं आ रही थीं।
इसके अलावा कपड़ा व परिधान, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, आभूषण और झींगा जैसे खाद्य उत्पादों के निर्यात में तेजी आने की संभावना है। इससे भारत वियतनाम और बांग्लादेश जैसे एशियाई देशों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी स्थिति में आ जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर के बीच अमेरिका को भारत के निर्यात में 15.9% की वृद्धि हुई और यह 85.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि आयात 46.1 अरब डॉलर रहा।
भारत बढ़ाएगा इन वस्तुओं की खरीद
समझौते के तहत भारत अमेरिका से
पेट्रोलियम उत्पाद
रक्षा उपकरण
इलेक्ट्रॉनिक्स
दूरसंचार उत्पाद
विमान
की खरीद बढ़ाएगा। साथ ही, कुछ कृषि उत्पादों के लिए भी सीमित बाजार पहुंच दी जा सकती है, जिससे भारतीय किसानों को नुकसान न हो। वर्ष 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर रहा।
तेल आयात में होगा बदलाव
इस समझौते का असर तेल आयात पर भी दिखेगा। भारत अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ा सकता है। भारतीय रिफाइनरियां रूस से तेल आयात धीरे-धीरे घटाकर अमेरिका, मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से आपूर्ति बढ़ा रही हैं। हालांकि, मौजूदा रूसी अनुबंधों से बाहर निकलने में समय लगेगा और सरकार ने फिलहाल पूर्ण प्रतिबंध का कोई आदेश नहीं दिया है।
इस्पात और एल्युमीनियम पर राहत सीमित
हालांकि पारस्परिक टैरिफ में कमी की उम्मीद है, लेकिन अमेरिका इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा, ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स और कुछ अन्य उत्पादों पर धारा 232 के तहत शुल्क लागू रख सकता है। ऐसे में कुछ भारतीय उत्पादों पर ऊंचा शुल्क बना रह सकता है या उसमें धीरे-धीरे कटौती हो सकती है।
2024 में भारत–अमेरिका व्यापार की तस्वीर
भारत का अमेरिका को प्रमुख निर्यात (2024):
दवाएं व जैविक उत्पाद: 8.1 अरब डॉलर
दूरसंचार उपकरण: 6.5 अरब डॉलर
कीमती व अर्ध-कीमती पत्थर: 5.3 अरब डॉलर
पेट्रोलियम उत्पाद: 4.1 अरब डॉलर
आभूषण: 3.2 अरब डॉलर
वाहन व ऑटो पुर्जे: 2.8 अरब डॉलर
सूती कपड़े: 2.8 अरब डॉलर
लोहा व इस्पात उत्पाद: 2.7 अरब डॉलर
अमेरिका से भारत का आयात:
कच्चा तेल: 4.5 अरब डॉलर
पेट्रोलियम उत्पाद: 3.6 अरब डॉलर
कोयला व कोक: 3.4 अरब डॉलर
हीरे (तराशे-पॉलिश्ड): 2.6 अरब डॉलर
विमान व पुर्जे: 1.3 अरब डॉलर
सोना: 1.3 अरब डॉलर
इसके अलावा, 2024 में भारत से अमेरिका को सेवाओं का निर्यात 40.6 अरब डॉलर रहा, जिसमें कंप्यूटर व सूचना सेवाओं का योगदान 16.7 अरब डॉलर और व्यवसाय प्रबंधन/परामर्श सेवाओं का 7.5 अरब डॉलर रहा।
आर्थिक विकास को मिलेगी नई ऊर्जा
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के साथ यह व्यापार समझौता भारत की आर्थिक विकास दर को मजबूती देगा और देश की विकास दर 6.9% तक रहने का अनुमान है। यह समझौता न केवल निर्यात बढ़ाएगा, बल्कि रोजगार सृजन और वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करेगा।