दक्षिण अफ्रीका–इजरायल संबंधों में तीखा टकराव, दोनों देशों ने राजनयिकों को किया निष्कासित

अंकारा।
दक्षिण अफ्रीका और इजरायल के बीच लंबे समय से चला आ रहा कूटनीतिक तनाव अब खुले टकराव में तब्दील हो गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के वरिष्ठ राजनयिकों को निष्कासित कर रिश्तों में और खटास ला दी है।
दक्षिण अफ्रीका ने इजरायल के उप-राजदूत एवं कार्यवाहक अधिकारी एरियल सेडमैन को पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित करते हुए देश छोड़ने का आदेश दिया है। इसके जवाब में इजरायल ने भी दक्षिण अफ्रीका के वरिष्ठ राजनयिक शॉन एडवर्ड बायनेवेल्ड को 72 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया।
निष्कासन के पीछे बताए गए कारण
दक्षिण अफ्रीकी विदेश मंत्रालय का कहना है कि एरियल सेडमैन के आचरण और सार्वजनिक बयानों से देश की गरिमा और संप्रभुता को ठेस पहुंची है।
राष्ट्रपति पर टिप्पणी: सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी।
राजनयिक शिष्टाचार की अनदेखी: इजरायली अधिकारियों की यात्राओं से संबंधित औपचारिक सूचनाएं साझा न करने का आरोप।
संप्रभुता पर सवाल: इजरायल के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से दक्षिण अफ्रीकी सरकार के खिलाफ अपमानजनक हमलों का आरोप।
इजरायल का त्वरित पलटवार
दक्षिण अफ्रीका के इस फैसले के कुछ घंटों बाद ही इजरायल ने भी प्रतिक्रिया देते हुए दक्षिण अफ्रीकी राजनयिक शॉन एडवर्ड बायनेवेल्ड को निष्कासित करने की घोषणा कर दी।
क्यों बिगड़े दोनों देशों के रिश्ते?
दोनों देशों के बीच तनाव कोई नया नहीं है।
गाजा युद्ध और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ): दक्षिण अफ्रीका ने इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनियों पर नरसंहार के आरोप लगाते हुए आईसीजे में याचिका दायर की है।
हमास को लेकर विवाद: इजरायल का आरोप है कि दक्षिण अफ्रीका हमास समर्थक रुख अपना रहा है।
राजनयिक स्तर में कटौती: वर्ष 2023 में इजरायल पहले ही अपने मुख्य राजदूत को वापस बुला चुका है।
अमेरिका की नजर
इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका की करीबी निगाह बनी हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका दक्षिण अफ्रीका की विदेश नीति की आलोचना करता रहा है। बीते वर्ष अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका के राजदूत इब्राहिम रसूल को उनके बयानों के चलते निष्कासित कर दिया था।
देश के भीतर भी विरोध
दक्षिण अफ्रीका में इस फैसले को लेकर विरोधी स्वर भी उभर रहे हैं। साउथ अफ्रीकन ज्यूइश बोर्ड ऑफ डेप्युटीज की अध्यक्ष कारेन मिलनर ने इसे अत्यधिक कठोर कदम बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर वरिष्ठ राजनयिक को निष्कासित करना कूटनीतिक परंपराओं के खिलाफ है।

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